लखनऊ : छात्र एवं युवासमाज का एक महत्वपूर्ण अंग हैं। आज चुनौतियों से भरे समय में छात्रों को ढेर सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जो कि हमारे समाज पर गलत असर डालेगा। उत्तर प्रदेश में आने वाले महीनों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। इस परिप्रेक्ष्य में स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइज़ेशन “यूपी”(एस आई ओ) ने आज यूपी प्रेस क्लब में छात्र घोषणा पत्र जारी किया।जो कि छात्र समुदाय की समस्याओं और मांगो को रेखांकित करता है। छात्रों एवं युवाओं के विचार व प्राथमिकताओं को इसके एजेंडे में शामिल किया गया है। यह घोषणापत्रछात्र व युवाओं के साथ उनके मुद्दों पर चर्चा परिचर्चा करने एवं व्यापक अध्ययन के बाद उत्तर प्रदेश के छात्र व युवाओं से संबधित महत्वपूर्ण मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए तैयार किया गया है। घोषणापत्र में कई मांगें और सिफारिशें शामिल हैं।
छात्र घोषणापत्र को आज यहाँ संगठन के राष्ट्रीय महासचिव तहूरअनवर ने जारी किया। उन्होंने ने इस अवसर पर कहा कि हम आशा करते हैं कि सभी राजनीतिक दल हमारे अनुरोधों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देंगे और अपना घोषणापत्र तैयार करते समय हमारी मांगों को ध्यान में रखेंगें। उन्होंने कहा कि हमने जिन मांगों को इस घोषणापत्र में शामिल किया है, वो मुख्यतः शिक्षा, कोविड महामारी के बाद राहत पैकेज, रोजगार और अन्य युवाओं की समस्याएं, स्वास्थ्य और कल्याण, मानवाधिकार, प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति और विविधता को बढ़ावा देने से सम्बन्धित हैं। हमें उम्मीद है कि यह वैचारिक चिंतन प्रक्रिया एक जीवंत लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उदाहरण बनेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि छात्रों और विशेष रूप से शिक्षा का मुद्दा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जो कि इस चुनाव के एजेंडों में शामिल होना चाहिए। इसके अतिरिक्त शिक्षा व रोज़गार एवं मानवाधिकार आदि मुद्दे भी इस चुनाव में चर्चा का विषय बनने चाहिए।

मुख्य मांगें निम्नवत हैं :
• समाज की आवश्यकता के अनुरुप विभिन्न शिक्षा आयोग की सिफारिशों के अनुसार शिक्षा पर खर्च के लिए जीडीपी को 8% तक बढ़ाया जाये.
• राज्य के मेडिकल कॉलेजों में यूपी के सरकारी स्कूलों व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के छात्रों के लिए 10 प्रतिशत सीटों का आरक्षण होना चाहिए।
• वर्तमान समय में संभल ज़िले में कोई राज्य या केंद्रीय विश्विद्यालय नहीं है। जिस कारण छात्र पढ़ाई के लिए पलायन करने को मजबूर हैं। हम संभल जिले में एक विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग करते हैं।
• मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को नेशनल कमीशन फॉर मॉइनारिटी एजेकुशनल इंस्टीट्यूशंस(NCMEI) द्वारा अल्पसंख्यक दर्जा मिला है। इसे सभी राजनीतिक हमलों से बचाना चाहिए और छात्र हित को ध्यान में ऱखते हुए कार्रवाई होनी चाहिए।
• राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में अरबी, उर्दू व इस्लामिक स्टडीज़ के लिए विभाग व पर्याप्त सीटें होनी चाहिए।
• मदरसा शिक्षा को एक वैध स्नातक डिग्री के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। इन पाठ्यक्रमों के आधार पर एम.ए. में पाठ्यक्रम शुरू किया जाना चाहिए।
• जस्टिस रंगनाथ मिश्रा आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाना चाहिए।
• छात्रों केबीच लोकतांत्रिक मूल्यों और भावनाओं को बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालयों एवं डिग्री कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव बहाल होने चाहिए।
• स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार की आवश्कता है। कंप्यूटर लैब, स्मार्ट क्लास रुम और लाइब्रेरी के साथ आधुनिक सुविधाओं को सरकारी स्कूलों में भी उपलब्ध किया जाना चाहिए।
• संविदा पर होने वाली भर्तियों में कटौती कर स्थायी नियुक्तियो को इस प्रकार सुनिश्चित किया जाए कि स्थायी नियुक्ति एक शैक्षिक वर्ष से अधिक समय के लिए मान्य हो।
• तंबाकू एवं नशीली वदाओं के दुरुपयोग के कानून सख्ती से लागू किए जाए। कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
• सरकार को हाईकोर्ट के जजों की निगरानी में एक ऐसे कमीशन का गठन करना चाहिए जो कोविड महामारी की दूसरी लहर में हुई वास्तविक मौतों की जांच करें और कहां कहां सरकार द्वारा चूक हुई इसका आंकलन करें।
• शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए रोहित एक्ट लागू किया जाए।
प्रेस वार्ता में लखनऊ विश्विद्द्यालय के प्रोफेसर डॉ अयाज़ अहमद इस्लाही, ज़ुबैर मालिक फलाही, एस आई ओ यूपी सेंट्रल के अध्यक्ष राफे इस्लाम, पश्चिमी यूपी के अध्यक्ष नदीम खान, पूर्वी यूपी के अध्यक्ष अहमद वासिफ, एस आई ओ ए एम यु के अध्यक्ष मोहम्मद ज़ैद आदि भी उपस्थित रहे।